अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह या दरगाह का निर्माण 1236 में हुआ था, जब सुल्तान इल्तुतमिश ने ख्वाजा साहब की कब्र पर एक मकबरा बनवाया था। लेकिन, ये दरगाह बार-बार विस्तार और संरचित की गई है।
ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का इंतेकाल 1236 में हुआ था, और उनकी क़ब्र पर एक सदा सा मकबरा बनाया गया था। बाद में, सुल्तान इल्तुतमिश ने 1236 में ही एक नया मकबरा बनवाया, जो आज भी दरगाह के रूप में मौजुद है।
बाद में, मुगल शाहों ने, खासकर अकबर ने, 1579 में दरगाह का विस्तार किया और उसमें कुछ नये महल और मस्जिद बनवाये। और, 1810 में, सिंधिया परिवार ने दरगाह का नया विस्तार किया और उसमें कुछ नये महल और मंडप बनवाये।
आजकल, अजमेर शरीफ दरगाह एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है, जहां हर साल लाखो लोग जियारत करने के लिए आते हैं।
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